जनपद फर्रूखाबाद के कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार रात भाकियू (टिकैत गुट) के कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला था। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अजय कटियार के नेतृत्व में दर्जनों किसान लिंक एक्सप्रेसवे के तीन कटों के लेआउट में बदलाव की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। जैसे-जैसे रात ढलती गई, कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस का पहरा सख्त होता गया। सीओ सिटी अभय वर्मा शहर के कई थानों और शमसाबाद थाने से अतिरिक्त पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंचे। पुलिस का बढ़ता दबाव और सख्त रुख देखकर जिलाध्यक्ष ने धरना स्थगित करने का फैसला किया, लेकिन इसके बाद असली विवाद शुरू हो गया।
होमगार्ड के साथ धक्का-मुक्की और गुंडा एक्ट का नोटिस थमाने पर मचा बवाल
धरना खत्म होने के तुरंत बाद मामला उस समय और तूल पकड़ गया जब होमगार्ड शिवपूजन के साथ धक्का-मुक्की और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा। होमगार्ड की शिकायत पर फतेहगढ़ कोतवाली में भाकियू जिलाध्यक्ष समेत सात नामजद और करीब 70 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसी बीच पुलिस ने जिलाध्यक्ष अजय कटियार को 20 जून को जारी हुआ गुंडा एक्ट का नोटिस थमाने की कोशिश की, जिसे लेने से जिलाध्यक्ष ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि वे किसानों के मुद्दे पर प्रदर्शन करने आए हैं, कोई नोटिस रिसीव नहीं करेंगे।

अस्पताल में पुलिस जीप का घेराव, जिलाध्यक्ष बोले- ‘गिरफ्तारी भी आंदोलन का हिस्सा है’
बृहस्पतिवार शाम पुलिस एक्शन मोड में आई और जिलाध्यक्ष अजय कटियार, महासचिव अभय यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद शाक्य, युवा जिलाध्यक्ष अनुज राजपूत, बृजेश गंगवार और शिवराम शाक्य को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस इन नेताओं को मेडिकल परीक्षण के लिए लोहिया अस्पताल ले गई, तो खबर मिलते ही दर्जनों कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। भारी नारेबाजी के बीच गुस्साए समर्थकों ने पुलिस की जीप को घेर लिया और गिरफ्तारी रोकने का प्रयास किया। हालांकि, जिलाध्यक्ष अजय कटियार ने खुद अपनी गाड़ी से उतरकर कार्यकर्ताओं को समझाया कि किसान हित के आंदोलन में गिरफ्तारी देना भी संघर्ष का ही एक हिस्सा है, जिसके बाद मामला शांत हुआ और पुलिस उन्हें अदालत में पेश कर सकी।



















