फर्रुखाबाद की जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कलेक्ट्रेट सभागार में हुई आईजीआरएस (IGRS) की बैठक में कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जनसुनवाई पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने चेतावनी दी कि जो अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, उनके खिलाफ न केवल प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी, बल्कि कठोर प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।
सिर्फ खानापूर्ति नहीं, मौके पर जाकर करना होगा समाधान
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि कुछ अधिकारी शिकायतों का केवल औपचारिक निस्तारण कर रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि अब से पोर्टल पर निस्तारण रिपोर्ट अपलोड करते समय ठोस सबूत (Evidence) भी लगाने होंगे। इसमें शिकायतकर्ता से हुई बातचीत का ब्यौरा, मौके पर जाकर की गई जांच की फोटो और अगर शिकायतकर्ता घर पर न मिले तो कम से कम दो पड़ोसियों के बयान दर्ज करना अनिवार्य होगा। डीएम ने कहा, “फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले दिन अब लद गए हैं।”

फोन न उठाने वाले अफसरों पर बरसीं जिलाधिकारी
DM डॉ. अंकुर लाठर उस वक्त बेहद नाराज दिखीं जब उन्हें पता चला कि कई अधिकारी शिकायतकर्ताओं से फोन पर बात तक नहीं करते। उन्होंने इसे ‘अनुशासनहीनता’ करार दिया। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि कार्यालय पहुंचते ही सबसे पहले IGRS पोर्टल चेक करें। अगर कोई शिकायत उनके विभाग की नहीं है, तो उसे 24 घंटे के भीतर संबंधित विभाग को ट्रांसफर करें। शिकायत को ‘डिफाल्टर’ श्रेणी में जाने से 5 दिन पहले ही उसका गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।
खराब रैंकिंग आई तो नपेंगे जिम्मेदार अधिकारी
जनपद की रैंकिंग को लेकर डीएम ने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों की लापरवाही से फर्रुखाबाद की रैंकिंग गिरेगी, वे सीधी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। पिछले एक महीने में जिन लोगों ने खराब फीडबैक दिया है, उन मामलों की दोबारा जांच होगी। राजस्व से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी एडीएम (वित्त एवं राजस्व) और अन्य विभागों की जिम्मेदारी सीडीओ को सौंपी गई है। बैठक में सीडीओ, एडीएम और सभी एसडीएम सहित जिले के तमाम बड़े अफसर मौजूद रहे।



















