जनपद फर्रूखाबाद के शमसाबाद क्षेत्र के गांव समैचीपुर चितार में गंगा नदी के कटाव ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी की तेज धारा के कारण गांव के तीन पक्के मकान—हुसैन मोहम्मद, अलाउद्दीन और शहनवाज के घर जलमग्न होकर नदी में समा गए। लगातार हो रहे कटाव के कारण अब तक गांव के पांच लोगों के मकान कट चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। नदी की कटान अब लालाराम, उनके पुत्र सुनील, संजीव और सरवन के मकानों की ओर बढ़ रही है, जिससे ग्रामीणों में गहरा खौफ है।
सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन और प्रशासन से गुहार
कटाव की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए ग्रामीण अपने घरों को खाली कर गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं। ग्राम प्रधान ताराबानो के अनुसार, कटरी तौफीक में भी गंगा खेतों को तेजी से काट रही हैं। वहीं सदर तहसील के दिलीप की मड़ैया का अस्तित्व पहले ही खत्म हो चुका है और अब नदी की धारा दौली की मड़ैया की ओर बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल कटान रोकने के स्थायी उपाय करने के बजाय अस्थायी सहायता दी जाती है। उन्होंने सरकार से गंगा के किनारे पक्का बांध बनाने की मांग की है ताकि इस वार्षिक त्रासदी से गांव को बचाया जा सके।

40 से अधिक गांव जलमग्न, फसलों को भारी नुकसान
अमृतपुर क्षेत्र में नरोरा बांध से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। तीसराम की मड़ैया, उदयपुर, कंचनपुर, सबलपुर, बरुआ और चित्रकूट समेत 40 से अधिक गांव पिछले 22 दिनों से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। खेतों में लंबे समय से पानी भरा रहने के कारण उड़द, मूंंग, तिल, बाजरा, धान और गन्ने की फसलें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। किसानों का कहना है कि गन्ने की बढ़त रुक जाने से इस सत्र में उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
























