फर्रुखाबाद : कायमगंज में पर्यावरण संकट के बीच शकुन्तला देवी शिक्षण संस्थान की महा-मुहिम, ‘वृक्ष लगाओ, जीवन बचाओ’ के नारे से गूंजी कम्पिल नगरी

शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर जनपद फर्रुखाबाद के कायमगंज नगर स्थित शकुन्तला देवी शिक्षण संस्थान ने प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। विद्यालय की प्रबन्धिका महोदया और इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य के नेतृत्व में समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मिलकर एक वृहद पौधरोपण अभियान चलाया। इस मुहिम के तहत कम्पिल नगरी के ऐतिहासिक रामेश्वरम मन्दिर से लेकर अटैना मार्ग पर पड़ने वाले कई गांवों में अलग-अलग प्रजातियों के छायादार पौधे लगाए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल पर्यावरण को बचाना है, बल्कि भविष्य में इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को तपती धूप में शीतल छाया और शुद्ध हवा मुहैया कराना भी है।

कम्पिल
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प्रबन्धिका महोदया की अपील : “वृक्ष ही हमारे सच्चे मित्र, इनका संरक्षण हमारा परम धर्म”

​पौधरोपण के दौरान ग्रामीणों को जागरूक करते हुए प्रबन्धिका महोदया ने भावुक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन के सच्चे मित्र हैं, जो बिना कुछ मांगे हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन और आश्रय देते हैं। आज के इस आधुनिक युग में प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, ऐसे में इन पौधों का रोपण और इनका संरक्षण करना हम सभी नागरिकों का नैतिक दायित्व है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उन्हें बड़ा करने का संकल्प भी लें।

कम्पिल
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प्रधानाचार्य सुतीक्षण श्रीवास्तव का महामंत्र : “हर परिवार का मुखिया लगवाए 5-5 पेड़, तभी बचेगा अस्तित्व”

​इस विषय पर सविस्तार प्रकाश डालते हुए इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुतीक्षण श्रीवास्तव ने पर्यावरण (परि + आवरण) की अनूठी परिभाषा समझाई। उन्होंने कहा कि वनस्पतियों, जीवधारियों और हरे-भरे जंगलों से घिरा यह परिवेश ही हमारे जीवन का मूल अस्तित्व है। आज यदि हमें शुद्ध वातावरण में सांस लेनी है, तो हर मनुष्य को प्राकृतिक संतुलन का ध्यान रखना होगा। उन्होंने देशवासियों से विनम्र अनुरोध करते हुए कहा कि हर परिवार का मुखिया अपने सदस्यों के साथ मिलकर कम से कम 5-5 पेड़ अवश्य लगवाए। अंत में सभी ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने और पेड़ों के अस्तित्व को बचाने की सामूहिक शपथ ली।

फर्रुखाबाद दर्पण
फर्रुखाबाद दर्पण
Amar Agnihotri
Author: Amar Agnihotri

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