दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक चलता है और इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। इस साल धनतेरस का पर्व 18 और 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन सोना-चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। पर ध्यान रखें — सोना महंगा है, इसलिए खरीदते समय जल्दबाजी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है।

सोना खरीदने से पहले रखें ये सावधानियां
फर्रुखाबाद के कायमगंज स्थित माया ज्वेलर्स के शालीन अग्रवाल कहते हैं कि सोने की ज्वेलरी खरीदते समय हमेशा बिल जरूर लें और उसकी शुद्धता चेक करें। ज्वेलरी की असली पहचान हॉलमार्क से होती है। अगर ज्वेलर असली सोना दे रहा है तो वह हॉलमार्क दिखाने से नहीं हिचकिचाएगा।
सोने की शुद्धता ऐसे पहचानें
सोने की ज्वेलरी पर BIS हॉलमार्क होना अनिवार्य है।
भारत सरकार के नियमों के मुताबिक किसी भी ज्वेलरी पर ये तीन निशान जरूर होने चाहिए:
1️⃣ BIS स्टैंडर्ड मार्क
2️⃣ कैरेट नंबर (जैसे 22K या 18K)
3️⃣ 6 अंकों का HUID कोड
अगर ये निशान साफ दिखें तो समझिए सोना असली है। लेकिन अगर हॉलमार्क धुंधला या संदिग्ध लगे, तो खरीदारी से बचें।

असली और नकली हॉलमार्क में फर्क समझें
कई बार ज्वेलर्स नकली हॉलमार्क लगाकर ग्राहकों को धोखा दे देते हैं। इसलिए ज्वेलरी खरीदते वक्त मोबाइल से BIS की वेबसाइट या BIS Care App से HUID नंबर स्कैन करें। इससे पता चलेगा कि सोना रजिस्टर्ड है या नहीं।
शहर के हिसाब से जानें सोने का रेट
भारत में सोना आयात किया जाता है, इसलिए डॉलर रेट, टैक्स और मेकिंग चार्ज इसके दामों को प्रभावित करते हैं। हर शहर में थोड़ा-बहुत अंतर होता है, इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर — जैसे फर्रुखाबाद, लखनऊ या कानपुर — में सोने का भाव जरूर जान लें।
कैरेट और मेकिंग चार्ज पर जरूर पूछें सवाल
22 कैरेट सोना 91.6% शुद्ध होता है, जबकि 18 कैरेट में सिर्फ 75% सोना होता है। खरीदते वक्त हमेशा पूछें कि ज्वेलरी किस कैरेट की है।
साथ ही, मेकिंग चार्ज पर मोलभाव जरूर करें। कई ज्वेलर्स इसी चार्ज में ज़्यादा पैसा वसूलते हैं। थोड़ी समझदारी दिखाकर आप सैकड़ों-हजारों रुपये बचा सकते हैं।

एक्सपर्ट की राय
एक्सपर्ट शालीन अग्रवाल कहते हैं,
“विश्वास तभी करें जब सब कुछ सामने दिखे। हॉलमार्क देखें, बिल लें और मेकिंग चार्ज समझें — यही असली समझदारी है।”













