गुरुवार को जनपद फर्रुखाबाद के कायमगंज कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गौकशी का खुलासा कर दिया है। बता दें कि बुधवार की देर रात उपनिरीक्षक आशीष कुमार सिंह ने फोर्स के साथ टेढ़ीकोन चौराहे के पास जबरदस्त घेराबंदी की। इस दौरान पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए बदमाशों के पास से दो अवैध देसी तमंचे (315 बोर), तीन जिंदा कारतूस, वारदात में इस्तेमाल होने वाली छोटी-बड़ी छुरियां और रस्सी बरामद की गई है।
पहले की गाय की रेकी, फिर केले के खेत में ले जाकर की क्रूरता
पूछताछ में के दौरान आरोपियों ने बताया कि 28 जून की शाम को उनके चौथे साथी चांद मियां (जो अभी फरार है) ने एक गाय की रेकी की थी। इसके बाद चारों ने मिलकर कटरा रहमत खां स्थित मस्जिद के सामने वाले रास्ते से गाय और उसके बछड़े को पकड़ लिया। वे दोनों को मंजूरमीर के केले के खेत में ले गए। वहां रस्सी से बांधकर बेरहमी से गाय को मौत के घाट उतार दिया गया, जबकि मासूम बछड़े पर भी छुरियों से हमला किया गया था।
बोरी में भरकर ले गए मांस, बच्चों ने देखा खून तो खुला राज
गौकशी के बाद आरोपी मांस को बोरियों में भरकर अपने-अपने घर ले गए। बची हुई हड्डियों को फरार आरोपी चांद मियां ने ठिकाने लगा दिया था। अगले दिन जब कुछ बच्चों ने खेत में भारी मात्रा में खून और अवशेष देखे, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार द्विवेदी, कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार शुक्ला व फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की थी।
पकड़े गए आरोपियों का है पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड, धाराएं बढ़ीं
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कटरा रहमत खान निवासी रफीक अहमद उर्फ राजू, अताईपुर खटको निवासी सिमरती उर्फ पप्पू और अताईपुर जदीद निवासी गुड्डू उर्फ सलीम खां के रूप में हुई है। वहीं चांद मियां उर्फ चांद अभी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि रफीक और सिमरती का पुराना आपराधिक इतिहास है, ये पहले भी गौकशी के मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस ने अब इस मामले में आर्म्स एक्ट और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की सख्त धाराएं भी जोड़ दी हैं।

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