जनपद फर्रुखाबाद के अमृतपुर कस्बे से एक ऐसी खबर आई है जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। यहां की निवासी कुसुमलता (पत्नी स्वर्गीय अखिलेश दर्जी) की एक सड़क दुर्घटना के बाद शुक्रवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। यह मौत सिर्फ एक जान का जाना नहीं है, बल्कि तीन मासूम जिंदगियों के सिर से छत छीन लेना है। कुसुमलता ही अपने बच्चों का एकमात्र सहारा थीं, जो अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
कैसे हुआ हादसा? चश्मदीद की जुबानी
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा कुछ दिन पहले परमापुर के पास हुआ था। स्थानीय महिला प्रवेश कुमारी, जो उस समय कुसुमलता के साथ थीं, उन्होंने बताया कि 21 फरवरी को दोनों पैदल सड़क पार कर रही थीं। इसी दौरान पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार बाइक ने कुसुमलता को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तुरंत फर्रुखाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

नियति का क्रूर खेल: 8 साल पहले पिता भी सड़क हादसे में ही मरे थे
परिजनों ने बताया कि लगभग आठ साल पहले कुसुमलता के पति अखिलेश की भी एक सड़क दुर्घटना में ही जान चली गई थी। पति की मौत के बाद कुसुमलता ने मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार को संभाला। डेढ़ साल पहले ही उन्होंने अपनी बड़ी बेटी दिव्यांशी की शादी की थी। लेकिन अब उनके जाने के बाद 17 साल की शिवांगी, 15 साल की हिमांशी और 12 साल का छोटा बेटा अर्चित बिल्कुल अकेले और अनाथ हो गए हैं।
पुलिसिया कार्रवाई और सड़क सुरक्षा पर सवाल
हादसे की खबर मिलते ही अमृतपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। दरोगा राघवेंद्र भदौरिया ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस घटना के बाद पूरे मोहल्ले में शोक की लहर है। लोग न केवल इस परिवार की बदहाली पर दुखी हैं, बल्कि क्षेत्र की बदहाल सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। प्रशासन के सामने अब इन अनाथ बच्चों के पालन-पोषण और भविष्य को सुरक्षित करने की बड़ी चुनौती है।


















