फर्रुखाबाद : नसबंदी के नाम पर उठाए गए 3000 आवारा कुत्ते गायब, एक महीने बाद भी नहीं लौटे वापस

फर्रुखाबाद से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नगरपालिका परिषद फर्रुखाबाद द्वारा एक टेंडर निकाला गया था। इस टेंडर के तहत जिले के अलग-अलग मोहल्लों से लगभग 3000 आवारा कुत्तों को नसबंदी के लिए उठाया गया था। जिस एजेंसी या फर्म को यह काम सौंपा गया था, उसने दावा किया था कि ऑपरेशन और रिकवरी के बाद सभी कुत्तों को वापस उन्हीं के मोहल्लों में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा।

महीना बीता पर नहीं लौटे कुत्ते, लोग परेशान

नियम के मुताबिक नसबंदी के तुरंत बाद कुत्तों को उनकी पुरानी जगह पर ही छोड़ना होता है ताकि उनका इलाका न बदले। लेकिन इस मामले में लापरवाही की सारी हदें पार हो गईं। कुत्तों को ले जाए हुए एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, मगर किसी भी मोहल्ले में एक भी कुत्ता वापस नहीं पहुंचाया गया। अधिवक्ता आयुष सक्सेना का कहना है कि नसबंदी के नाम पर कुत्तों को उठाकर ले जाने के बाद जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी भूल गए हैं।

फर्रुखाबाद
खाली पड़ा पिंजड़ा

जांच में बड़ा खुलासा : नसबंदी केंद्र से भी गायब मिले कुत्ते

मामले में नया मोड़ तब आया जब वर्तमान स्थिति का पता लगाने के लिए उस जगह की जांच की गई जहां कुत्तों को नसबंदी के लिए ले जाया गया था। हैरान करने वाली बात यह है कि उस नसबंदी केंद्र पर भी अब एक भी कुत्ता मौजूद नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वो 3000 कुत्ते कहां गए? क्या उनके साथ कोई अनहोनी हुई है या फिर कागजों पर ही खेल कर दिया गया?

लापरवाह फर्म पर सख्त कार्रवाई की मांग

इस पूरे मामले पर अधिवक्ता आयुष सक्सेना ने जिलाधिकारी अंकुर लाठर से लिखित शिकायत कर पूरे मामले पर जांच करने का निवेदन किया गया है कि जिस फर्म को आवारा कुत्तों की नसबंदी का टेंडर दिया गया था, उसके खिलाफ तुरंत कड़ी और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह मांग भी की गई है कि उन बेसहारा और बेजुबान कुत्तों को जल्द से जल्द ढूंढकर वापस उन्हीं मोहल्लों में छोड़ा जाए जहां से उन्हें उठाया गया था।

फर्रुखाबाद दर्पण
फर्रुखाबाद दर्पण
Amar Agnihotri
Author: Amar Agnihotri

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