जनपद फर्रुखाबाद के कम्पिल थाना के गांव निजामुद्दीनपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यहां एक देवरानी ने अपने जेठ को लिवर दान कर न सिर्फ उनकी जान बचाई, बल्कि इंसानियत और रिश्तों की मिसाल भी कायम कर दी।
गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे अकबर
गांव निजामुद्दीनपुर निवासी अकबर पिछले करीब आठ महीनों से लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि लिवर ट्रांसप्लांट ही उनकी जान बचा सकता है। परिवार के लिए यह समय बेहद मुश्किल भरा था।
पत्नी ने छोड़ा साथ, बढ़ गई परेशानी
बीमारी के दौरान अकबर की पत्नी अपने 8 साल के बेटे के साथ मायके चली गईं। इस फैसले से परिवार पूरी तरह टूट गया और अकबर की जिंदगी की उम्मीदें और भी कम हो गई।
देवरानी ने लिया बड़ा फैसला, बदल गई कहानी
जब हर रास्ता बंद नजर आ रहा था, तब अकबर के छोटे भाई अमजद की 29 वर्षीय पत्नी निदा परवीन आगे आईं। उन्होंने बिना किसी झिझक अपने जेठ को लिवर दान करने का फैसला किया। यह फैसला पूरे परिवार के लिए संजीवनी बन गया।
दिल्ली में सफल रहा लिवर ट्रांसप्लांट
Delhi के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक लिवर ट्रांसप्लांट किया। फिलहाल निदा परवीन और अकबर दोनों की हालत स्थिर है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से रिकवरी हो रही है।
“यह मेरा फर्ज था” – निदा परवीन
निदा परवीन ने कहा, “जेठ मेरे बड़े भाई जैसे हैं। उनका जीवन बचाना मेरे लिए सबसे जरूरी था। मैंने जो किया, उसे अपना फर्ज समझकर किया।”
आज पूरा क्षेत्र उनके साहस और फैसले की सराहना कर रहा है।


















