फर्रुखाबाद में भारतीय किसान यूनियन (अखंड प्रदेश उत्तर प्रदेश) ने UGC 2026 बिल को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन ने इस बिल को छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा है। यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी कायमगंज के माध्यम से सौंपा गया, जिसमें सरकार से बिल को वापस लेने या इसमें बड़े संशोधन की मांग की गई है।

छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर, बढ़ेगा सामाजिक विभाजन
ज्ञापन में किसान यूनियन ने कहा कि UGC 2026 बिल के नए प्रावधान छात्रों की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। संगठन का मानना है कि इस बिल से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी और समाज में भेदभाव बढ़ने की आशंका है। यूनियन ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा कानूनों के जरिए छात्रों को जाति और धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही है, जो देश के भविष्य के लिए खतरनाक है।

सभी वर्गों के छात्रों को मिले समान अधिकार
भारतीय किसान यूनियन ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि SC, ST, OBC और जनरल वर्ग के सभी छात्रों को समान अधिकार दिए जाएं। संगठन ने कहा कि किसी भी शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाए और जब तक आरोप पूरी तरह सिद्ध न हों, तब तक किसी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। इससे छात्रों में डर और असुरक्षा का माहौल खत्म होगा।

झूठी शिकायत पर हो सख्त कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि किसी छात्र के खिलाफ की गई शिकायत जांच में झूठी पाई जाती है, तो ऐसे शिकायतकर्ता पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि झूठी शिकायतों से छात्रों का भविष्य बर्बाद हो सकता है, इसलिए नियमों में पारदर्शिता और न्याय जरूरी है।

भ्रष्टाचार किसी जाति से नहीं, व्यक्ति की सोच से जुड़ा है
भारतीय किसान यूनियन ने अपने ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार किसी जाति विशेष से जुड़ा हुआ नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति की मानसिकता का परिणाम होता है। संगठन ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता और समानता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

राष्ट्रपति से पुनर्विचार की अपील
अंत में संगठन ने महामहिम राष्ट्रपति से अपील की कि UGC 2026 बिल पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाए और इसमें जरूरी संशोधन किए जाएं, ताकि छात्रों के बीच भेदभाव न बढ़े और देश का भविष्य सुरक्षित रह सके।

















