आलू की नगरी कहे जाने वाले फर्रुखाबाद में किसान बेबस: लागत भी नहीं निकली, मजबूरी में ट्रैक्टर से जोती दो बीघा फसल

फर्रुखाबाद जिसे आलू की नगरी कहा जाता है, वहां इन दिनों किसानों की हालत बेहद खराब है। कड़ाके की ठंड में दिन-रात खेतों में मेहनत करने वाले किसान अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बाजार में आलू के बेहद कम दाम मिलने से किसान परेशान हैं और उनकी महीनों की मेहनत मिट्टी में मिलती नजर आ रही है।

मोहम्मदाबाद में किसान ने खुद जोती अपनी फसल

मोहम्मदाबाद नगर पंचायत क्षेत्र के खिमसेपुर स्थित ग्राम नंदसा में किसान अमरजीत सिंह ने अपनी दो बीघा तैयार आलू की फसल ट्रैक्टर से जोत दी। उनका कहना है कि मौजूदा बाजार भाव में आलू निकलवाना घाटे का सौदा है, इसलिए फसल नष्ट करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।

100 रुपये पैकेट बिक रहा आलू, 60 हजार की लागत डूबी

किसान अमरजीत सिंह ने बताया कि इस समय आलू 100 से 125 रुपये प्रति पैकेट के भाव बिक रहा है। जबकि उन्होंने कोल्ड स्टोरेज से 2000 रुपये में 14 पैकेट बीज खरीदे थे। इसके अलावा चार बोरी डीएपी खाद, सिंचाई, जुताई और मेहनत जोड़कर करीब 60 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। ऐसे में लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

खुदाई कराना भी बन रहा घाटे का सौदा

किसान का कहना है कि अगर मजदूर लगाकर आलू खुदवाए जाते, तो मजदूरी तक नहीं निकलती। इसलिए मजबूरी में फसल जोतनी पड़ी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो बाकी खेतों की फसल भी नष्ट करनी पड़ेगी।

सांसद पर साधा निशाना, किसानों में आक्रोश

अमरजीत सिंह ने सांसद मुकेश राजपूत पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आलू किसानों की समस्याओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वहीं किसान महावीर और मुकेश कश्यप ने भी कहा कि अगर आलू के दाम नहीं बढ़े, तो वे भी अपनी फसल जोतने को मजबूर होंगे।

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