मुगल बादशाह नहीं, महाभारत के ‘पांचाल’ से होगी फर्रुखाबाद की पहचान? शासन को भेजा जाएगा बड़ा प्रस्ताव!

फर्रुखाबाद जनपद के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को वापस दिलाने के लिए हिंदू समाज पार्टी ने एक बड़ी मुहिम छेड़ दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अंकित तिवारी ने जनपद के नामकरण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान नाम ‘फर्रुखाबाद’ साल 1714 में मुगल बादशाह फर्रुखसियर के नाम पर रखा गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस धरती का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है, तो इसका नाम किसी मुगल शासक के नाम पर क्यों होना चाहिए? इसी भावना के साथ शहर में नाम बदलने के लिए एक विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।

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फर्रुखाबाद शहर

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महाभारत कालीन इतिहास: द्रुपद की राजधानी और पांचाली की जन्मस्थली है यह धरती

अंकित तिवारी ने बताया कि फर्रुखाबाद का पौराणिक इतिहास अत्यंत समृद्ध है। यह क्षेत्र राजा द्रुपद की राजधानी था और यहीं महाभारत की प्रमुख पात्र माता पांचाली (द्रौपदी) का जन्म हुआ था। इतना ही नहीं, यह गुरु द्रोणाचार्य का क्षेत्र भी रहा है। पांडवों ने अपने अज्ञातवास का एक बड़ा हिस्सा इसी जनपद में बिताया था, जिसकी गवाही आज भी रेलवे रोड स्थित उनके द्वारा स्थापित ‘पांडेश्वर नाथ शिवालय’ देता है। पार्टी का मानना है कि ‘पांचाल नगर’ नाम इस गौरवशाली विरासत को सही सम्मान देगा।

फर्रुखाबाद
फर्रुखाबाद

22,000 लोगों का मिला समर्थन, होली के बाद शासन को सौंपा जाएगा प्रस्ताव

हिंदू समाज पार्टी द्वारा चलाया गया यह हस्ताक्षर अभियान बुधवार को संपन्न हो गया, जिसमें लगभग 22,000 आम नागरिकों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया है। राष्ट्रीय संगठन मंत्री राजेश मिश्रा ने इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। पार्टी ने घोषणा की है कि होली के त्यौहार के बाद, संगठन के पदाधिकारी प्रदेश के एमएलसी, विधायकों और सांसदों से मुलाकात करेंगे। उन्हें इन हस्ताक्षरित प्रपत्रों की छायाप्रति और ‘नाम संशोधन’ का औपचारिक प्रस्ताव सौंपा जाएगा ताकि इसे राज्य शासन को भेजा जा सके।

फर्रुखाबाद
फर्रुखाबाद

जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी जनता की आवाज

अभियान की सफलता के बाद अब अगला कदम प्रशासनिक कार्यवाही है। हिंदू समाज पार्टी के पदाधिकारियों के अनुसार, जल्द ही जिलाधिकारी फर्रुखाबाद को भी एक ज्ञापन और जनसमर्थन का दस्तावेज सौंपा जाएगा। उनसे आग्रह किया जाएगा कि जनभावनाओं को देखते हुए इस प्रस्ताव को शासन तक पहुँचाया जाए। संगठन का कहना है कि यह मुद्दा सीधे तौर पर जनपद के मान-सम्मान और उसकी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, जिसे अब निर्णायक मोड़ तक ले जाया जाएगा।

Amar Agnihotri
Author: Amar Agnihotri

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