फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन से रविवार की दोपहर करीब 2:30 बजे उत्सर्ग एक्सप्रेस छपरा के लिए रवाना हुई। ट्रेन में कुल 22 डिब्बे थे और वह स्टेशन से करीब एक किलोमीटर आगे बढ़ चुकी थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि आगे पटरियों पर जानलेवा खतरा इंतजार कर रहा है।

हाईटेंशन तार टूटा, पटरी पर गिरा
फतेहगढ़ स्टेशन के पास अचानक 25 हजार वोल्ट की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन पतंग फंसने की वजह से टूट गई। टूटता हुआ हाईटेंशन तार रेलवे ट्रैक को छूने लगा, जिससे चिंगारियां निकलने लगीं और पटरी पर गड्ढे तक बन गए। अगर ट्रेन आगे बढ़ती, तो बड़ा हादसा तय था।

क्रिकेट खेल रहे लड़कों की सूझबूझ
पास के मैदान में क्रिकेट खेल रहे कुछ युवकों ने तार से चिंगारियां निकलते देखीं। उसी समय उन्हें ट्रेन की आवाज सुनाई दी। हालात की गंभीरता समझते हुए एक युवक ने तुरंत लाल कपड़ा लिया और पटरियों पर दौड़कर ट्रेन को संकेत दिया।

लोको पायलट की सतर्कता से रुकी ट्रेन
लोको पायलट अयोध्या प्रसाद ने लाल कपड़ा देखते ही तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। ट्रेन धीरे-धीरे रुक गई और बड़ा हादसा टल गया। यात्रियों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई, लेकिन सभी सुरक्षित रहे।

यात्रियों में मची हलचल
ट्रेन रुकते ही कई यात्री नीचे उतर आए। यात्रियों ने बताया कि अचानक तेज झटका लगा और ट्रेन रुक गई। बाद में पता चला कि आगे हाईटेंशन तार टूटा हुआ है।

रेलवे और पुलिस मौके पर पहुंची
सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने लटके हुए तार को ऊपर कराया और लाइन दुरुस्त करने का काम शुरू किया। करीब एक घंटे तक ट्रेन ट्रैक पर खड़ी रही।

मरम्मत के बाद फिर रवाना हुई ट्रेन
सुरक्षा जांच और ओवरहेड वायर की मरम्मत के बाद ट्रेन को वापस फर्रुखाबाद स्टेशन लाया गया। करीब तीन घंटे बाद शाम 5:30 बजे ट्रेन को दोबारा छपरा के लिए रवाना किया गया।

बहादुरी की हो रही सराहना
युवकों की सूझबूझ और लोको पायलट की सतर्कता से सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई। रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है कि पतंग आखिर तार में कैसे फंसी और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।


















