जनपद फर्रुखाबाद के कायमगंज में आठ साल पहले हुए एक दिल दहला देने वाले मर्डर और लूटकांड में आखिरकार इंसाफ की घड़ी आ गई है। सोमवार को कोर्ट ने इस सनसनीखेज मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए चार आरोपियों को हत्या, लूट और चोरी का माल अपने पास रखने के जुर्म में दोषी करार दिया है। हालांकि, डकैती और आपराधिक साजिश के आरोपों से कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अब पूरे जिले की नजरें आने वाली 17 जून की तारीख पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन अदालत इन शातिर दोषियों की सजा का ऐलान करेगी।
अकेली सास, बंद दरवाजा और घर के अंदर का खौफनाक मंजर
इस खौफनाक वारदात की शुरुआत बुलंदशहर के खुर्जा निवासी डॉ. जितेंद्र सोलंकी की तहरीर पर हुई थी। उन्होंने फरवरी 2018 को कायमगंज थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। डॉ. सोलंकी ने पुलिस को बताया था कि कायमगंज के मोहल्ला पाठक में उनकी सास साधना गौड़ अकेली रहती थीं। 14 फरवरी को पड़ोसियों ने फोन कर बताया कि उनके घर का मुख्य गेट तो खुला है, लेकिन अंदर का दूसरा दरवाजा बंद है और कोई हलचल नहीं हो रही है। जब सोलंकी अपनी पत्नी डॉ. प्रिया के साथ वहां पहुंचे, तो घर के अंदर का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए।
हाथ-पैर बंधे और मुंह में ठूंसा कपड़ा, बेरहमी की सारी हदें पार
जब पड़ोसियों की मदद से घर का दरवाजा खोला गया, तो अंदर साधना गौड़ की लाश औंधे मुंह जमीन पर पड़ी थी। बदमाशों ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए बुजुर्ग महिला के हाथ-पैर रस्सी से पीछे बांध रखे थे और मुंह में कपड़ा ठूंसकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। पूरा घर तहस-नहस था और अलमारियां खुली पड़ी थीं। शातिर लुटेरे घर से लाखों की नकदी और सोने-चांदी के कीमती जेवरात लूटकर रफूचक्कर हो चुके थे।
इन 4 गुनहगारों को कोर्ट ने ठहराया दोषी, 17 जून को आएगा फैसला
पुलिस की लंबी जांच, चार्जशीट और पुख्ता गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने विमलेश यादव, नेपाली यादव, रवि उपाध्याय और शिवम उर्फ अनुपम शुक्ला को हत्या और लूट का असली गुनहगार माना है। वहीं मामले से जुड़े एक बाल अपचारी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अब इलाके के लोग उत्सुकता से 17 जून का इंतजार कर रहे हैं कि कोर्ट इन हत्यारों को क्या सजा सुनाती है।



















