फर्रुखाबाद में एक अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट, चोटी काटने और लूटपाट के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दोषी पाए गए दारोगा और सिपाही को 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
जुर्माना न भरने पर बढ़ेगी सजा
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी आरोपी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ेगा। इस फैसले से पुलिस की मनमानी पर बड़ा संदेश गया है।
चौकी पर बुलाकर की गई थी मारपीट
पीड़ित अधिवक्ता के अनुसार, जब वह अपने दो साथियों के साथ चौकी पहुंचे थे, तभी वहां मौजूद तत्कालीन एसएसआई दीपक कुमार, सिपाही सुरेंद्र सिंह और नवनीत यादव ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपियों ने बेरहमी से मारपीट की।
चोटी काटी, नकदी छीनी, मोबाइल तोड़े
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने जबरन उनकी चोटी काट दी, जेब में रखे 2 हजार रुपये छीन लिए और मोबाइल फोन तोड़ दिए। इतना ही नहीं, मोबाइल के सिम कार्ड भी गायब कर दिए गए।
पहले दोष सिद्ध, अब सजा सुनाई गई
बीते 14 जनवरी को विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र एवं तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने तत्कालीन कर्नलगंज चौकी प्रभारी अनिल भदौरिया और सिपाही सुरेंद्र सिंह को दोषी करार दिया था। शुक्रवार को सजा पर सुनवाई करते हुए दोनों को 10 साल की कठोर सजा सुनाई गई।


















