फर्रुखाबाद पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: अपहरण-दुष्कर्म मामले में युवक को 7 साल की सजा, जुर्माना

फर्रुखाबाद में पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने अपहरण और दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट रितिका त्यागी की अदालत ने युवक प्रशांत को दोषी मानते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

जहानगंज थाना क्षेत्र से की है घटना 

यह पूरा मामला जहानगंज थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है। यहां रहने वाले एक ग्रामीण ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित पिता का कहना था कि गांव का ही रहने वाला प्रशांत उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था।

3 फरवरी 2017 की घटना

शिकायत के मुताबिक, 3 फरवरी 2017 को प्रशांत नाबालिग लड़की को घर से ले गया। आरोप यह भी लगाए गए कि इस अपराध में उसके माता-पिता और एक अन्य साथी ने भी मदद की। पीड़ित परिवार ने कई बार जहानगंज थाने के चक्कर लगाए, लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

एसपी से शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस

थाने से निराश होकर 22 फरवरी 2017 को पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना पूरी होने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।

अदालत में चली लंबी सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास कटियार और प्रदीप सिंह ने मजबूत दलीलें पेश कीं। अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों का बारीकी से अध्ययन किया।

फैसला: एक दोषी, तीन बरी

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रशांत को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया। उसे सात साल की सजा और 40 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने साफ किया कि जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, सबूतों के अभाव में प्रशांत के माता-पिता और एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया।

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