Farrukhabad News : जनपद फर्रुखाबाद के कायमगंज नगर के सीपी सभागार में पितृपक्ष के पावन अवसर पर पूर्वजों की पुण्य स्मृति में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास श्री शिवानंद भाईश्री महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों और सूत जी के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु की कथा केवल सुनना ही धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को सुसंस्कारित करने और परमात्मा से जोड़ने का सबसे सरल मार्ग है। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल से सराबोर नजर आया।

राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग से मिला आत्मसंयम का ज्ञान
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए व्यास जी ने महाराज परीक्षित के चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित अत्यंत धर्मपरायण और प्रजा का ध्यान रखने वाले न्यायप्रिय राजा थे। उन्होंने अपने राज्य में कलियुग के बढ़ते प्रभाव को रोककर धर्म की रक्षा की। हालांकि, जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। एक पल के क्रोध और अनजाने में हुई चूक ने उनके पूरे जीवन का घटनाक्रम ही बदल दिया। महाराज ने श्रद्धालुओं को समझाया कि व्यक्ति चाहे कितना भी महान या प्रभावशाली क्यों न हो, उसे हमेशा अपने विवेक और वाणी पर संयम रखना चाहिए।
क्षणिक आवेश और शृंगी ऋषि के श्राप की कथा
कथा व्यास ने बताया कि एक दिन शिकार के दौरान प्यास से व्याकुल राजा परीक्षित शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि गहन समाधि में थे, जिसके कारण वे राजा का स्वागत न कर सके। इसे अपना अनादर समझकर राजा ने आवेश में आकर एक मृत सर्प ऋषि के गले में डाल दिया। इस घटना से क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र शृंगी ने राजा को सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से मृत्यु का श्राप दे दिया। जब समाधि से उठकर शमीक ऋषि को यह बात पता चली, तो उन्होंने अपने पुत्र के इस उतावलेपन पर दुख जताया और कहा कि राजा की एक छोटी सी भूल के लिए इतना कठोर दंड देना उचित नहीं था।

पश्चाताप और प्रभु शरण से ही संभव है जीवन का उद्धार
कथा के माध्यम से भाईश्री महाराज ने संदेश दिया कि मनुष्य को कभी भी अपने पद, प्रतिष्ठा या ज्ञान का अहंकार नहीं करना चाहिए। क्रोध में लिया गया एक गलत निर्णय पूरे जीवन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, जब व्यक्ति को अपनी भूल का एहसास हो जाता है, तो सच्चा पश्चाताप और ईश्वर की शरण ही उसे सही मार्ग दिखाती है। इसी घटना के बाद महाराज परीक्षित ने श्रीशुकदेव जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत की अमृतमयी कथा का श्रवण किया, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान शिवनंदन, सत्यप्रकाश अग्रवाल, मिथलेश अग्रवाल, पूर्व विधायक अमर सिंह खटिक, प्रहलाद नारायण, सत्य नारायण अग्रवाल, उमेश, शंभू शरण अग्रवाल, संजय बंसल, निशांत गुप्ता, अवनीश दुबे व सुमित पांडेय समेत अन्य भक्तगण मौजूद रहे।


























